खातेगांव में माँ नर्मदा भाव जागरण एवं संस्कार केंद्र का शुभारंभ
संस्कारों से सशक्त बाल मन, संस्कृति और राष्ट्रभाव से जुड़ती नई पीढ़ी
मध्यप्रदेश जिला देवास के नगर खातेगांव में बच्चों के भीतर संस्कार, राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति तथा माँ नर्मदा के प्रति श्रद्धा और भाव जागृत करने के उद्देश्य से माँ नर्मदा भाव जागरण एवं संस्कार केंद्र का शुभारंभ किया गया।
यह पहल नर्मदा अनंत प्रवाह शोध फाउंडेशन (NAP SHODH FOUNDATION) के संस्कार एवं सांस्कृतिक जागरण से जुड़े प्रयासों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व में संस्कार, अनुशासन, सेवा, श्रद्धा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे जीवन-मूल्यों का विकास करना है।
बाल मन में संस्कार, भविष्य के राष्ट्र का आधार
बचपन जीवन का वह समय है जब विचारों और मूल्यों की नींव रखी जाती है। इसी भावना के साथ संस्कार केंद्र में बच्चों को सहज और आनंददायी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
केंद्र के माध्यम से बच्चों में—
- 🇮🇳 राष्ट्रभक्ति एवं देश के प्रति गौरव
- 🙏 माता-पिता, गुरुजनों एवं बड़ों के प्रति सम्मान
- 🪔 भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति श्रद्धा
- 🌊 माँ नर्मदा एवं प्रकृति के प्रति भाव और संवेदनशीलता
- ❤️ सेवा, करुणा एवं मानवता की भावना
- 🤝 सामाजिक जिम्मेदारी एवं सहयोग की भावना
- 📚 नैतिक शिक्षा एवं अनुशासित जीवन
- 🌱 पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति प्रेम
जैसे मूल्यों को विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
प्रत्येक शनिवार एवं रविवार संस्कार केंद्र का संचालन
संस्कार केंद्र का संचालन प्रत्येक शनिवार एवं रविवार किया जाता है। बच्चों को कहानी, संवाद, प्रार्थना, देशभक्ति गीत, भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रसंग, नैतिक कथाएँ, सामूहिक गतिविधियाँ एवं विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कार एवं जीवन-मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
हमारा प्रयास है कि बच्चे अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा, अपनी धरती, अपनी नदियों और अपने राष्ट्र के प्रति आत्मीयता का भाव विकसित करें।
शिवम यादव एवं उनकी जीवनसंगिनी की प्रेरणादायी नर्मदा साधना
इस संस्कार केंद्र के संचालन में श्री शिवम यादव जी एवं उनकी जीवनसंगिनी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
माँ नर्मदा के प्रति उनकी श्रद्धा केवल विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में भी यह आस्था दिखाई देती है। विवाह के मात्र 10 दिन बाद ही दोनों पति-पत्नी ने पैदल नर्मदा परिक्रमा का संकल्प लेकर माँ नर्मदा की परिक्रमा की।
उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अनुशासन, संकल्प, त्याग, धैर्य, प्रकृति के प्रति संवेदना और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ाव का प्रेरणादायी अनुभव है।
इसी जीवन-अनुभव और माँ नर्मदा के प्रति श्रद्धा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की भावना से शिवम यादव जी एवं उनकी जीवनसंगिनी द्वारा संस्कार केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
संत माधव दास जी के सान्निध्य में शुभारंभ
इस संस्कार केंद्र का शुभारंभ संत माधव दास जी के पावन सान्निध्य में किया गया। संतों के मार्गदर्शन, स्थानीय समाज की सहभागिता और समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रयासों से यह केंद्र बच्चों के चरित्र निर्माण एवं सांस्कृतिक जागरण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
हमारा संकल्प
हमारा विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि बाल मन में अच्छे संस्कारों के छोटे-छोटे बीज बोने से शुरू होता है।
आज यदि बच्चों के मन में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव, माँ नर्मदा के प्रति श्रद्धा, प्रकृति के प्रति संवेदना, समाज के प्रति सेवा भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव विकसित किया जाए, तो यही बच्चे भविष्य में एक संस्कारवान, संवेदनशील और जिम्मेदार समाज का निर्माण करेंगे।
हमारा प्रयास
“बाल मन में संस्कार का बीजारोपण, संस्कृति से जुड़ाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण—यही माँ नर्मदा भाव जागरण एवं संस्कार केंद्र का उद्देश्य है।”
📍 स्थान
खातेगांव, जिला देवास, मध्य प्रदेश
नर्मदा अनंत प्रवाह शोध फाउंडेशन (NAP SHODH FOUNDATION)
अध्ययन • अनुभव • अनुभूति

